जगदलपुर: बस्तर की पर्वतारोही नैना सिंह धाकड़ द्वारा विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने नैना के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा है कि नैना ने अपने दृढ़ संकल्प, इच्छाशक्ति तथा अदम्य साहस से विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर विजय प्राप्त कर अपनी इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।

नैना धाकड़ ने माउंट एवरेस्ट 01 जून सुबह 09 बजे विश्व की ऊंची चोटी पर देश-प्रदेश के साथ बस्तर का परचम लहराया। नैना ने 09 दिनों में विश्व की 02 ऊंची चोटियों में भारत और राज्य का झंडा फहराया। नैना के लिए यह अभियान बेहद खास रहा क्योंकि मौसम खराब होने और एवलांच आने से जब अन्य पर्वतारोही ने हार मानकर वापस लौट आए, फिर भी नैना ने अपने दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचने का कारनामा कर दिखाया।
माउंट एवरेस्ट की 8848.86 मीटर की ऊंचाई को छूकर रचा इतिहास
इस दौरान इनके साथ पर्वतारोहण पर निकले लोगो ने तो एक सबमिट भी नही किया। जिद्दी नैना 02 सबमिट कर काठमाण्डू वापस पहुंच चुकी हैं। विगत 10 दिनों की अवधि में दो चक्रवात ताउते और यास ने इन अभियानों में काफी दिक्कतें पैदा की, इस चक्रवात के साथ-साथ कोविड-19 महामारी ने भी इस साल को पिछले साल के एवरेस्ट अभियान से अलग बना दिया है। इसके बावजूद उन्होंने 01 जून को पहले माउंट लाहोत्से जो 8516 मीटर ऊंचा फतह किया। फिर एवरेस्ट की 8848.86 मीटर की ऊंचाई को भी नाप कर अविश्वसनीय जीत दर्ज राज्य की प्रथम महिला बन गयी हैं।
उल्लेखनीय है कि टाकरागुड़ा बस्तर की रहने वाली बस्तर की बेटी नैना सिंह धाकड़ पिछले 10 वर्षों से माउंट एवरेस्ट पर फतह करने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले वे हिमालय की कई चोटियों पर भी चढ़ाई कर चुकी हैं। यही नहीं, भूटान में भी स्नो मैन ट्रैक में हिस्सा लिया, जिसमें वे एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्रीपाल की टीम में शामिल रहीं।
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जिला प्रशासन के सहयोग से नैना का माउंट एवरेस्ट का सपना हुआ साकार
नैना सिंह धाकड़ शहर के महारानी लक्ष्मीबाईस्कूल से स्कूली शिक्षा के बाद पीजी कॉलेज धरमपुरा से बीए किया। इसके साथ ही डीसीए, पीजीडीसीए, एमएसडब्ल्यू, बीपीएड किया। बाद में पर्वतारोहण में बेसिक माउंटेनियरिंग, एडवांस माउंटेनियरिंग, एमओआई कोर्स, रॉक बेसिक एंड एडवांस, एसएनआर सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स किया हुआ है।
बस्तर कलेक्टर रजत बंसल ने बताया कि नैना पिछली बार भी आर्थिक कारणों से एवरेस्ट के अभियान पर जाने से चूक गई थीं। इस बार मुख्यमंत्री के निर्देश पर एनएमडीसी और जिला प्रशासन के सहयोग से नैना का सपना साकार हुआ और उन्होंने देश-प्रदेश के साथ बस्तर का नाम रोशन किया। 01 अप्रैल 2021 को वो एवरेस्ट को फतह करने के अभियान में जगदलपुर से निकली थी। नैना ने नेपाल में दक्षिण-पूर्व का रास्ता चुना है।
यह रास्ता माउंट एवरेस्ट से ऊंचाई, बीमारी, मौसम और हवा के साथ-साथ हिमस्खलन और खुंबू ग्लेशियर जैसे खतरों से भरा पड़ा है। 13 मई को खराब मौसम के कारण जब विश्व की अधिकतर टीम अभियान रद्द कर वापस बेस कैंप लौट आई थी, तब भी नैना पहले प्रयास में एवरेस्ट फतह नही होने के बाद भी हिम्मत बनाए रखी।