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October 30, 2026
बिजनेस

अमेजन-फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच का स्टे आदेश हाईकोर्ट में खारिज

-कर्नाटक हाईकोर्ट डबल बेंच ने अमेजन-फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच का स्टे आदेश किया खारिज

नई दिल्ली: अमेजन-फ्लिपकार्ट के ई-कॉमर्स व्यापार मॉडल के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच पर लगे स्टे को कर्नाटक हाईकोर्ट की डबल बेंच ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। इससे CCI द्वारा अमेजन-फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

अमेजन-फ्लिपकार्ट

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुआ कहा कि अब CCI को अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच शुरू करने में की देरी नहीं करनी चाहिए।

अमेजन-फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच का स्टे आदेश किया खारिज

गौरतलब है कि CCI ने प्रतिस्पर्धा कानून तहत अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ जनवरी 2020 में जांच का आदेश दिया था, जिसके बाद ये दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों ने फरवरी 2020 में कर्नाटक हाईकोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया था।

इसके बाद CCI ने हाईकोर्ट में एक अपील दाखिल की थी, जिसके बाद न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई कर जून में अमेजन और फ्लिपकार्ट की याचिका को ख़ारिज कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले का इन दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों ने उच्च न्यायालय की डबल बेंच में अपील की, जिसे हाईकोर्ट ने आज ख़ारिज कर दिया।

कैट महामंत्री खंडेलवाल ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इस आदेश के बाद अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच शुरू करने में कोई बाधा नहीं है।

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इसलिए अब CCI को तुरंत इन दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों का भारत में उसके बिजनेस मॉडल के खिलाफ जांच शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जो लोग लगातार कानून और नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं उन पर नकेल कसी जाए।

विदेशी कंपनियां भारत को मानती है कमजोर देश

खंडेलवाल ने कहा कि ई-कॉमर्स क्षेत्र में विदेशी कंपनियां भारत को कमजोर देश मानकर मनमर्जी कर रही हैं। इन कंपनियों के लिए कानूनों, नीतियों और नियमों की अनिवार्य पालना का कोई महत्व नहीं है, जिससे देश के छोटे व्यापारियों को बहुत नुकसान हो रहा है। इसलिए अब केंद्र सरकार को इन कंपनियों के खिलाफ सभी संभव कदम उठाते हुए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से आग्रह किया कि इन विदेशी फंडिंग वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को भारत के क़ानून, नियम एवं नीतियों की अनिवार्य पालना के लिए बाध्य करना चाहिए। कैट महामंत्री ने गोयल से आग्रह किया है एफडीआई नीति के प्रेस नोट नंबर 2 की जगह बहुप्रतीक्षित नया प्रेस नोट तुरंत जारी किया जाए।

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