व्यायाम का महत्व: लेखक बेन माइकलिस के द्वारा कहा गया है कि, “शरीर मन है और मन शरीर है। जब आप खुद का ख्याल रखते हैं, तो आप अपने संपूर्ण शरीर को सुचारू रूप से काम करने में मदद कर रहे होते हैं।” लेकिन आज के दौर में लगभग हर इंसान हर समय किसी न किसी उलझन में जकड़ा हुआ है।
जिस कारण लोगों की जीवनशैली पूरी तरह से बिगड़ रही है, जिसका नकारात्मक असर शारीरिक और मानसिक सेहत पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में व्यायाम का महत्व समझना आवश्यक हो जाता है।

व्यायाम का महत्व: याददाश्त में होता है सुधार
एक्सरसाइज या व्यायाम से इंसान शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। व्यायाम करना हमारे शरीर के लिए उतना ही जरूरी है, जितना कि भोजन करना और पानी पीना। शोधकर्ताओं ने इस बात का दावा किया है कि सिर्फ 30 मिनट कसरत करने से आप अपनी याददाश्त में सुधार ला सकते हैं। आज के समय में भोजन, कपड़े और आश्रय के अलावा व्यायाम भी इंसान की ज़रूरत बन चुका है।
आज के दौर में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और डिप्रेशन होना आम बात हो गई है। ऐसे में इन बीमारियों को व्यायाम के जरिए काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। इसलिए इसका महत्व उन्हें ही पता चल पाता है जो नियमित रूप से व्यायाम करते हैं। व्यायाम करने से शरीर में संतुलन और एक स्थिर दिमाग बना रहता है।
कोई इंसान शारीरिक वृद्धि और विकास के लिए अपने अंग नियमित रूप चला रहा है तो उसका दूसरा नाम व्यायाम ही है। वैज्ञानिक इस बात को जानने का भी काम कर रहे हैं कि प्रतिदिन व्यायाम करने के सकारात्मक प्रभाव क्या हैं। व्यायाम करने के लिए सबसे अच्छा समय प्रातःकाल माना जाता है। क्योंकि पूरे दिन शरीर में चुस्ती फूर्ती बनी रहती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है।
हमेशा से ही व्यायाम हमें तंदुरुस्त और स्वस्थ रखने के लिए सबसे अधिक सहायक रहा है। एक स्वस्थ व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बेहतरी को संदर्भित करता है। वही व्यक्ति अच्छे स्वास्थ्य का आनंद ले सकता है जो शारीरिक बीमारियों और मानसिक तनाव से रहित हो।
कई बीमारियों को दूर करने में सहायक
विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा कहा गया है कि स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले रोगियों में से चार में से एक को कम से कम एक मानसिक, तंत्रिका संबंधी या व्यवहार संबंधी समस्या होती है।
कई अध्ययनों से यह बात भी सामने आई है कि इन समस्याओं को दूर करने के लिए व्यायाम चिकित्सीय की तरह भूमिका निभा सकता है और यह डिप्रेशन से निकलने में भी सहायक है। तनाव को दूर करने का व्यायाम प्राकृतिक तरीका है, इससे मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं और हृदय स्वस्थ बना रहता है, जिससे स्वस्थ जीवन शैली की नींव रखी जाती है।
व्यायाम में कैसे कम होता है डिप्रेशन?
आज बच्चे भी परिस्थितियों के अनुसार उदास और परेशान हैं अगर इन भावनाओं बच्चे को लंबे समय तक ग्रस्त रहे तो वे डिप्रेशन का शिकार हैं। ऐसे में व्यायाम उसके लिए एक बेहतर उपाय है। क्योंकि शारीरिक क्रियाओं से शरीर एक केमिकल का स्त्राव करता है जिसे विज्ञान की भाषा मे एंडोर्फिन कहा जाता हैं।
जिससे शरीर में यह मस्तिष्क के रिसेप्टरों के साथ क्रिया करते हैं जो आपके डिप्रेशन कम होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रतिदिन एक घंटें व्यायाम और शारीरिक क्रियाएं करके तनाव कम किया जा सकता है।
एक अध्ययन से पता चला है कि 64 प्रतिशत भारतीय कभी भी व्यायाम नहीं करते हैं और इसमें सबसे अधिक संख्या महिलाओं की है। महिलाएं अपनी ज़िंदगी में इतनी अधिक व्यस्त हो चुकी हैं कि उनके पास व्यायाम करने का भी समय नहीं होता है, सबसे बड़ा कारण यही है कि महिलाएं डायबिटीज, मोटापे व रक्तचाप जैसी बीमारियों का जल्दी शिकार हो जाती हैं, क्योंकि ये बीमारियां उनकी जीवनशैली से जुड़ी होती हैं।
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28 करोड़ से अधिक आबादी डिप्रेशन से हैं ग्रस्त
WHO के आंकड़ों के अनुसार 28 करोड़ से अधिक आबादी डिप्रेशन से ग्रस्त है। डिप्रेशन से पीड़ित हर साल 7 लाख लोग आत्महत्या कर लेते है। ऐसे में बेचैनी, अकेलापन, अनिद्रा, तनाव, जीवन में न उम्मीदी और आत्मविश्वास की कमी को व्यायाम के द्वारा दूर किया जा सकता है।
आप अपने शरीर को जितना ज़्यादा चलाएंगे उतने ही अच्छे प्रभाव देखने को मिलेंगे। योग, जॉगिंग, दौड़, डांस या फिर साइकलिंग, आप चाहे कोई भी एक्सरसाइज़ करें इससे आपको ज़रूर फायदा होगा। हमेशा याद रखें कि स्वास्थ्य से अनमोल कोई चीज नहीं है।
सोनाली