19.2 C
New Delhi
October 30, 2026
एजुकेशन/करियर

1 मिलियन अमेरिकी डालर से IIT कानपुर में स्थापित होगा शिवानी केन्द्र

- शिवानी केन्द्र से भारतीय भाषाओं में निपुण होंगे कानपुर IIT के छात्र
- छात्रों को रोजगार के अवसरों के साथ-साथ व्यक्तिगत विकास में मिलेगी मदद

कानपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में अध्ययनरत छात्र अंग्रेजी में पारंगत होते हैं, लेकिन अन्य भाषाओं में उनकी पकड़ कमजोर रहती है। इसको देखते हुए IITके एक पूर्व छात्र ने अपनी मां के नाम से शिवानी केन्द्र को स्थापित किया है। जिससे हिन्दी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में IIT के छात्र निपुण होंगे। इसके साथ छात्रों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनका व्यक्तिगत विकास भी होगा। यह शिवानी केन्द्र एक अमेरिकी डालर से IIT कानपुर में स्थापित होगा।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IITK) ने देश भर के स्कूलों में शिक्षा के गैर-अंग्रेजी माध्यम के साथ शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के लिए शिवानी केंद्र स्थापित किया है। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के पोषण और पुन: एकीकरण के लिए नव स्थापित शिवानी केंद्र छात्रों के शैक्षणिक कार्यक्रम के अंत में भाषा के आधार पर प्रतिबंधित नौकरी के अवसरों की चुनौती को दूर करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

भारतीय भाषाओं की पृष्ठभूमि वाले छात्रों को साथियों के साथ सामाजिक एकीकरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करने के लिए भी जाना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे भाषा की बाधा के कारण शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास के अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

IIT कानपुर
एक मिलियन अमेरिकी डालर का मिलेगा अनुदान

यह केंद्र मिकी और विनीता चैरिटेबल फण्ड से एक मिलियन अमरीकी डालर के अनुदान के साथ स्थापित किया जा रहा है। बताया गया कि हमारे पूर्व छात्र मुक्तेश (मिकी) पंत (बीटी/सीएच/76) अपनी दिवंगत मां गौरा पंत जिनको शिवानी के नाम से जाना जाता है की स्मृति में इस केंद्र की स्थापना कर रहे हैं। वह स्वंय में हिंदी साहित्य की एक संस्था हैं और उन्हें 20वीं शताब्दी के सबसे लोकप्रिय हिंदी लेखकों में से एक माना जाता है।

उन्हें वर्ष 1982 में हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। संस्थापक मिकी पंत और विनीता चैरिटेबल फंड ने कहा कि, जबकि भाषाओं का ज्ञान हमेशा अच्छा होता है, लेकिन इंजीनियरिंग में शीर्ष शिक्षा प्राप्त करने के लिए अंग्रेजी भाषा में पारंगत होना एक प्रमुख कारक नहीं होना चाहिए। ।

अकादमिक संसाधनों का होगा निर्माण

शिवानी केंद्र के उद्देश्यों में से एक छात्रों को आत्म-अभिव्यक्ति और व्यक्तिगत विकास के अवसर प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करना है। उन्हें संस्थान के सामाजिक-शैक्षणिक परिवेश के साथ धीरे-धीरे एकीकृत करने की अनुमति देते हुए उन्हें बहिष्कार और अलगाव की भावनाओं से बचाना है। केंद्र इन मुद्दों को न केवल संस्थान स्तर पर बल्कि सामान्य रूप से देश में उच्च शिक्षा के संदर्भ में अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में अकादमिक संसाधनों (एसटीईएम सामग्री, पाठ्यपुस्तक, संदर्भ, डिजिटल उपकरण) के निर्माण की सुविधा प्रदान करने का प्रयास करेगा।

शिवानी केंद्र डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं (ओआईएल) के उपयोग को आसान बनाने के लिए तकनीकी उपकरणों के प्रसार को सक्षम करेगा। केंद्र IIT कानपुर में हिंदी और अन्य भारतीय भाषा पृष्ठभूमि के छात्रों का सामाजिक-भावनात्मक एकीकरण और हिंदी और भारतीय भाषाओं (ओआईएल) का उपयोग करके संचार, साहित्यिक और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देगा।

Also Read: सरकारी स्कूलों 1 लाख छात्रों को School of Excellence के तहत मुफ्त शिक्षा
महत्वपूर्ण हैं भारतीय भाषाएं

IIT कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि यह स्वीकार किया गया है कि भारतीय भाषाएं शैक्षिक और सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे शिक्षा में समानता को मजबूत करती हैं। भारतीय भाषाओं की पृष्ठभूमि वाले छात्रों को अंग्रेजी भाषा आधारित पाठ्यक्रम सामग्री को नेविगेट करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और परिणामस्वरूप अक्सर अकादमिक और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है।

शिवानी केंद्र से IIT कानपुर के परिसर में शैक्षिक प्रथाओं में एक आदर्श बदलाव लाने की उम्मीद है। यह संस्थान में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं (ओआईएल) की पृष्ठभूमि के छात्रों के निर्बाध एकीकरण को सुनिश्चित करेगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करेगा। मैं केंद्र की स्थापना के लिए उदार दान के लिए हमारे विशिष्ट पूर्व छात्र मिकी पंत का आभारी हूं।

Related posts

सरकार ने शिक्षा प्रौद्योगिकी का नया संस्करण नीट-2.0 किया लॉन्च

Buland Dustak

sc छात्रों की पोस्टमैट्रिक स्कॉलरशिप योजना के लिए 59हजार करोड़ रुपये की मंजूरी

Buland Dustak

2021 उम्मीदों भरा : फिर से होंगी भर्तियां, मिलेगी नौकरी

Buland Dustak

नई शिक्षा नीति बच्चों को आर्टिफिशियल से इफेक्टिव इंटेलिजेंस की ओर ले जाएगी

Buland Dustak

उप राष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा संस्थानों से किया सामाजिक समस्या पर शोध का आग्रह

Buland Dustak

IIT दिल्‍ली के शोधकर्ताओं ने विकसित की ई-कचरा प्रबंधन की नई तकनीक

Buland Dustak