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October 30, 2026
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जावेद अख्तर: शब्दों के जादूगर मशहूर शायर एवं गीतकार

शब्दों के जादूगर जावेद अख्तर ने क्लैपर बॉय के रूप में की थी करियर की शुरूआत बॉलीवुड में अपनी लेखनी का जलवा बिखेरने वाले मशहूर शायर, लेखक, स्क्रीनराइटर एवं गीतकार जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी,1945 को ग्वालियर में हुआ था। उनके पिता जां निसार अख्तर प्रसिद्ध कवि और माता सफिया अख्तर मशहूर उर्दु लेखिका थीं। लेखन का हुनर जावेद को विरासत में मिला था।

बचपन से ही जावेद को घर में ऐसा माहौल मिला जिसमें उन्हें कविताओं और संगीत का अच्छा खासा ज्ञान हो गया। बचपन मे जावेद के  माता-पिता उन्हें प्यार से जादू कहकर पुकारा करते थे। यह नाम उनके पिता की लिखी कविता की एक पंक्ति.. लम्हा, लम्हा किसी जादू का फसाना होगा… से लिया गया था। बाद में उन्हें जावेद नाम दिया गया।

जावेद अख्तर
1964 में अपनी पहचान बनाने मुंबई आए जावेद

जावेद की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब उनके बचपन में ही मां का निधन हो गया। पिता ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद अपने नाना नानी और बाद में खाला के यहां रहने लगे। साल 1964 में काम की तलाश और अपनी अलग पहचान बनाने के लिए मुंबई आ गए। यहां शुरूआती दौर में जावेद ने बहुत कठिनाइयों में जीवन गुजारा। उनके पास ना रहने का कोई ठिकाना था, ना खाने को खाना। लेकिन जावेद ने परिस्तिथियों से हार नहीं मानी।

अपने करियर की शुरुआत सरहदी लूटेरा की थी। इस फिल्म में सलीम खान हीरो थे और जावेद क्लैपर बॉय। इसके बाद दोनों की दोस्ती हो गई और सलीम-जावेद की जोड़ी के नाम से मशहूर हो गए। दोनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा के लिए कई सुपर-हिट फिल्मो की पटकथाएं लिखी। दोनों ने मिलकर साल 1971-1982 तक करीबन 24 फिल्मों में साथ किया जिनमें सीता और गीता, शोले, हाथी मेरा साथी, यादों की बारात, दीवार आदी फिल्मे शामिल हैं।

javed akhtar song collection
सलीम-जावेद की बनी सुपरहिट जोड़ी

साल 1987 में आई फिल्म ‘मिस्टर इंडिया‘ के बाद सलीम-जावेद की सुपरहिट जोड़ी अलग हो गई। इसके बाद भी फिल्मों के लिए संवाद लिखने का काम जारी रखा। जावेद ने कई फिल्मों के सुपरहिट गीत भी लिखे जिसमें इक लड़की को देखा (1942 ए लव स्टोरी), घर से निकलते ही (पापा कहते हैं), संदेशे आते हैं (बॉर्डर), राधा कैसे न जले (लगान) आदि शामिल हैं।

जावेद ने दो शादियां की। उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी थीं। जिनसे उन्हें दो बच्चे है फरहान अख्तर और जोया अख्तर और दोनों ही हिंदी सिनेमा के जाने माने अभिनेता, निर्देशक-निर्माता हैं। हनी ईरानी से तलाक के बाद 1984 में  जावेद ने दूसरी शादी  शबाना आजमी से की। 

जावेद अख्तर को साल 1999 में साहित्य के जगत में जावेद अख्तर के बहुमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें पदमश्री से नवाजा गया। 2007 में जावेद अख्तर को पदम भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।

यह भी पढ़ें: महादेवी वर्मा : हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती

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