इतिहास गवाह है कि जब भी भूमि से जुड़ा कोई विवाद होता है तो नुकसान व्यक्ति को ही सहना पड़ता है और कुछ ऐसा ही मामला मिजोरम तथा असम राज्यों के बीच है। विवाद ज़मीन का है और नुकसान जनता झेल रही है।
हाल ही में 10 जुलाई 2021 को यह भूमि विवाद और बढ़ गया जिसकी वजह से दोनो राज्यों के बीच काफी हिंसा हुई है। प्रश्न यह है कि इस मामले की शुरुआत कैसे हुई? उत्तर पूर्वी राज्य आपस में काफी पास-पास स्थित हैं जिसकी वजह से सीमा विवाद हो रहा है।
1875 में मिजोरम का नाम “लुशाई हिल्स” हुआ करता था। उस समय असम के “काचर” ज़िले को मिजोरम तथा असम राज्य की सीमा को चुना गया था जो कि दोनों को अलग करती थी।

इसके बाद 1933 में “वैरेंगटे कस्बे” को जो कि मिजोरम में है उसको दोनों राज्यों की सीमा बना दिया गया और यहीं से भूमि विवाद जन्म लेता है क्योंकि 1933 में असम के पास अधिक ज़मीन आई थी तो दूसरी ओर 1875 में मिजोरम के हक में ज़्यादा भूमि आई थी।
ऐसे में दोनों राज्य जिसमें उनको अधिक ज़मीन मिली है। इस पर मिजोरम का कहना है कि “बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट 1873” के तहत जो सीमाएँ निर्धारित की गईं है उसी को माना जाए तो दूसरी ओर असम 1933 में तय की गई सीमा को अपना रहा है। यानी बीच का रास्ता कुछ निकल नहीं रहा है जिसकी वजह से यह दोनों राज्य आपस में लड़ रहे हैं।
कब-कब हुई है दोनों राज्यों के बीच झड़प?
2018 में जब हिंसा होती है तो उसके बाद से यह मुद्दा चर्चा में आता है और अक्टूबर 2020 से लगातार छोटी-बड़ी झड़प होती आ रही है। लैलापुर जो कि असम राज्य के अंतर्गत आता है और मिजोरम के बिल्कुल पास स्थित है, वहाँ कुछ लोग जो झोपड़ियों में रह कर अपना गुज़ारा कर रहे थे तो मिजोरम के कुछ लोगों ने उन सभी झोपड़ियों में आग लगा दी।
जवाब में लैलापुर से आए कुछ लोगों ने मिजोरम पुलिस पर पत्थर फेंक कर वार किया और अभी हाल ही में 10 जुलाई 2021 को मिजोरम की तरफ से असम के अधिकारियों पर “कामचलाऊ विस्फोटक युक्ति” फेंके गए जिसके चलते अब इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।
इस मामले पर संज्ञान लेते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर पूर्वी राज्य का दौरा किया और इन दोनों राज्य के मुख्यमंत्रियों से इस मामले पर वार्तालाप की। मगर अमित शाह के जाते ही मात्र 48 घण्टे के अंदर इन दोनों ही राज्यों के बीच इतनी तगड़ी झड़प होती है कि छः जवान शहीद हो जाते हैं तथा 50 से अधिक लोग ज़ख़्मी हो गए हैं।
इस भयानक हिंसा का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि मिजोरम पुलिस ने “मशीन गन” तक का उपयोग इस हिंसा में कर दिया था। वहीं असम के मुख्यमंत्री हेमन्त बिस्वास शर्मा ने जवानों के शहीद होने पर दुःख जताया है।
किस भूमि को लेकर हो रहा है विवाद?
देखा जाए तो काचर तथा लैलापुर इन दोनों भूमि को लेकर इस मामले का जन्म हुआ है। पहाड़ों में खेती कर पाना काफी मुश्किल कार्य है मगर यहाँ की ज़मीन को ऐसा बना दिया गया था जिसके चलते वहाँ के लोग अब खेती कर रहे हैं।
ऐसे में यह इलाका असम राज्य में है मगर मिजोरम का कहना है कि पहले हमने इस ज़मीन को खेती के लायक बनाया है तो इस पर हमारा हक है मगर असम इस बात को मानने से मना कर रहा है।
इसके अलावा मिजोरम का कहना है कि असम के काचर ज़िले में मिजोरम राज्य के लोग काफी समय से रह रहे हैं, तो इस वजह से यह उसके राज्य के अंतर्गत होना चाहिए। अगर अभी तक जितनी भी हिंसा हुई है उस पर गौर करें तो मिजोरम की तरफ से लोग पहले हिंसा करने में आगे आए हैं।
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आखिर दोनों राज्य इस मामले को खत्म कैसे करेंगे?
हाल ही में हुई हिंसा के बाद मिजोरम तथा असम के मुख्यमंत्रियों के बीच “ट्विटर वार” शुरू हो गई थी। दोनों ही हिंसा का आरोप एक-दूसरे के ऊपर लगा रहे थे जिसमें अमित शाह ने असम राज्य को यह आदेश दिया है कि जल्द ही वह अपने राज्य की पुलिस को मिजोरम बार्डर से हटाए ताकि CRPF के जवान वहाँ का जिम्मा सँभाल सकें।
बहरहाल, असम के मुख्यमंत्री “हेमंत बिस्वास शर्मा” ने इस मामले को कम करने की कवायद शुरू की है जिसके चलते वह जल्द ही मिजोरम जाएंगे और मुख्यमंत्री “जोरामथांगा” से मिलकर दोनों राज्यों के बीच पुनः शांति तथा अच्छे संबन्ध स्थापित करेंगे।
इसके अलावा मिजोरम सरकार ने कहा है कि यह हिंसा बेवजह हुई है जो कि काफी दुःखद है। तो कुल-मिलाकर धीरे-धीरे दोनों राज्य आपस में तालमेल बैठने को लेकर शुरुआत कर दिए हैं। अब निगाहें इस वार्ता पर टिकीं है साथ ही यही उम्मीद है कि इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिले और भूमि विवाद जल्द ही समाप्त हो सके।
-यशस्वी सिंह