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October 30, 2026
उत्तर प्रदेश

गोरखपुर बन रही ज्ञान की नगरी, एक साथ 2 विश्वविद्यालयों की सौगात

-राष्ट्रपति आयुष विश्वविद्यालय की रखेंगे नींव, गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय का करेंगे लोकार्पण
-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर को बना रहे ज्ञान की नगरी

लखनऊ/गोरखपुर: संभवतः यह पहला अवसर होगा जब किसी एक जनपद को एक ही दिन दो विश्वविद्यालय की सौगात मिलने जा रही हो, वह भी राष्ट्रपति के हाथों। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से 28 अगस्त यानि शनिवार का दिन गोरखपुर के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने जा रहा है।

इस दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द जनपद के भटहट ब्लॉक के पिपरी-तरकुलहा में राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगे। साथ ही उनके कर कमलों से गोरक्षपीठ के अधीन संचालित गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय सोनबरसा मानीराम का लोकार्पण भी होगा।

गोरखपुर विश्वविद्यालय

दो नए विश्वविद्यालयों की सौगात मिलने के साथ ही गोरखपुर की शैक्षिक उपलब्धियों में कुल चार विश्वविद्यालय हो जाएंगे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की पहले से ही विशेष ख्याति रही है। अब महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर दो नए विश्वविद्यालय गोरखपुर को ‘सिटी ऑफ नॉलेज’ बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

गौरतलब हो कि एक विश्वविद्यालय की नींव रखने और दूसरे का लोकार्पण करने आ रहे राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द 10 दिसम्बर 2018 को भी गोरखपुर आए थे। तब उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में बतौर मुख्य अतिथि परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 तक गोरखपुर को सिटी ऑफ नॉलेज के रूप में प्रतिष्ठित होने की मंशा जताई थी। करीब पौने तीन साल बाद जब वह दोबारा गोरखपुर में होंगे तो उनकी जताई मंशा पर सीएम योगी के प्रयास का परिणाम भी उन्हें दिखेगा।

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राज्य सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि शिक्षा और चिकित्सा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उनके राजनीतिक जीवन के शुरुआत से ही निजी प्राथमिकता का विषय रहा है, उस पर राष्ट्रपति से मिली प्रेरणा। वाकई राष्ट्रपति की मंशा के अनुरूप मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में गोरखपुर बहुत तेजी से ज्ञान की नगरी बनने की दिशा में अग्रसर है।

दो विश्वविद्यालयों का इतिहास सृजित होने जा रहा है

गोरखपुर में अब होने जा रहे चार विश्वविद्यालयों में से तीन का जुड़ाव गोरक्षपीठ से है। इनमें सबसे पहले गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना का सबसे बड़ा श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादागुरु और तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ को है। उन्होंने अपने बनाए दो कॉलेज विश्वविद्यालय बनाने के लिए राज्य सरकार को दान में दे दिए थे।

प्रवक्ता ने बताया कि 28 अगस्त को राष्ट्रपति के हाथों जिन दो विश्वविद्यालयों का इतिहास सृजित होने जा रहा है, उनमें से एक गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय सोनबरसा मानीराम की स्थापना ही गोरक्षपीठ ने की है। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जनसेवा के लिए बनकर तैयार यह विश्वविद्यालय उसी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का नया शैक्षिक पड़ाव है, जिसकी शुरुआत 1932 में ही महंत दिग्विजयनाथ ने कर दी थी।

राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की नींव के पत्थर के रूप में भी गोरक्षपीठ का नाम दर्ज रहेगा। इस विश्वविद्यालय का नामकरण महायोगी गुरु गोरक्षनाथ उत्तर प्रदेश राज्य आयुष विश्वविद्यालय किया गया है। इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना से लेकर इसे धरातलीय स्वरूप देने का श्रेय सीएम योगी को है जो गोरक्षपीठ के कर्ताधर्ता भी हैं।

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