जोधपुर, 10 फरवरी (हि.स.)। शहर के एम्स चिकित्सालय में डॉक्टरों की टीम ने एक्मो उपचार प्रणाली को अपनाकर मरीज को नया जीवन दान दिया है। मरीज अब 14 दिन बाद भी स्वस्थ है। उसे सर्दी, खांसी और बुखार से पीडि़ता होने पर लाया गया था।

एम्स अस्पताल के अनुसार पचपदरा निवासी एक 41 साल का एक मरीज बुखार, खांसी, सांस में कठिनाई और खांसी में खून आने की शिकायत लेकर भर्ती हुआ। उसकी कई तरह की जांच के साथ कोरोना टेस्ट भी किया, जो निगेटिव आया। सीटी स्केन में सामने आया कि उसके 90 फीसदी फेफड़े खराब थे। मरीज को 7 दिन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा, लेकिन फेफड़ों में कोई सुधार नहीं दिखा। इसके बाद मरीज की जान बचाने प्लान किया कि जब तक की मरीज के फेफड़े निमोनिया से ठीक नहीं हो जाते, तब तक एक्मो मशीन लगाकर रखें।
एक्मो डालने का निर्णय लिया:
चिकित्सकों की टीम ने 27 जनवरी को कार्डियोथोरेसिक सर्जरी टीम, एनेस्थीसिया व क्रिटिकल केयर टीम ने मिलकर एक्मो डालने को निर्णय किया, जो सफलतापूर्वक लगा दिया गया। मरीज को एक्मो लगे अब 14 दिन हो गए हैं, उसकी हालत स्थिर है। पूर्ण रिकवरी होने पर एक्मो मशीन हटाई जाएगी। पश्चिमी राजस्थान में लगाया ये पहला एक्मो है जो मरीज के जीवनरक्षक का कार्य करेगा।
कैसे काम करता है एक्मो :
चिकित्सकों के अनुसार एक्मो कृत्रिम हृदय और फेफड़े का कार्य करने की मशीन है, जो मरीज के शरीर से अशुद्ध रक्त निकालकर शुद्ध करके वापस शरीर में डालती है। मशीन हृदय एवं फेफड़ों दोनों को 6-8 सप्ताह बाईपास कर सकती है। इससे फेफड़े एवं हृदय को गंभीर बीमारी से रिकवर होने का समय मिल जाता है । मरीज के फेफड़े खराब थे, इसलिए उन्हें बायपास किया, जिसे विनो वीनस एक्मो कहते हैं।
एक्मो का प्रयोग हार्ट या फेफड़े या दोनों खराब होने पर उनके प्रत्यारोपण तक, बीमार को जिंदा रखने के लिए भी प्रयोग में लाते हैं। इसमें गर्दन व पैरों की नसों में नलियां डाली जाती हैं। इस मशीन का संचालन विशेष रूप से ट्रेनिंग प्राप्त कार्डियक परफ्यूजनिस्ट करते हैं। यह मशीन जोधपुर में केवल एम्स में उपलब्ध है।
इन डॉक्टरों की टीम का रहा सहयोग:
चिकित्सकों की टीम में शामिल डॉ. मधुसूदन कट्टी, डॉ. अनुपम दास, डॉ. दानिश्वर मीणा, डॉ. प्रमोद और डॉ. अनिरुद्ध का भी सहयोग रहा।
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